शनिवार, 5 दिसंबर 2009

रोपवाकर


Visit blogadda.com to discover Indian blogsहमारा सबसे बडा शत्रु है हमारी सोच. यदि हम पोजिटिव सोच रखें तो हमें अपना लक्ष्य पाने से कोई नहीं रोक सकता. और हमारे मन में यदि नेगेटिविटी ने घर कर लिया तो बस मुश्किल ही मुश्किल.


एक छोटा लड़का था. उसकी चाह थी, साइकिल चलाने की. वह एक दिन उठा, साइकिल उठाई और पेड़लिंग चालू. लेकिन कुछ ही दिन में वह हिम्मत हार गया. वह लोगों से टकराता था, सड़क पर गिरता था और बार बार अपने चोट लगाता था.

उसने सोचा, नहीं ये मेरे बस की बात नहीं. निराश, वो उस रात सो नहीं सका. वह सोचता रहा कि कैसे वह साइकिल चलाना सीखे. तभी उसके मन में एक विचार आया. सड़क के अंत में एक फुटबॉल मैदान है, वह वहाँ जाकर साइकिल सीख सकता है. वहाँ टकराने के लिये लोग नहीं होंगे. अगली सुबह,उसने यह मुहिम शुरू की और मैदान के चक्कर लगाने लगा. अब वह खुश था, कुछ दिनों के बाद, उसे लगने लगा कि वह अब सड़क पर जा सकता है. खुशी से भरा हुआ, वह अपनी साइकिल लेकर सड़क पर जा पहुँचा. लेकिन अफसोस! वह सड़कपर जाते ही एक साइकिल से टकराया और गिर गया. चोट इतनी कि वह अस्पताल ले जाया गया. जब लड़के को होश आया तो उसने अपने पिता को अपने पास पाया, लड़का दु:खी था, बोला, "पापा, मैं साइकिल चलाना नहीं सीख सकता”. पिता ने कहा, "बच्चे ! अभी तुम आराम करो." दो एक दिन में लड़का घर लौट आया. उसके दिमाग में पक्का यकीन था कि साइकिल उसके लिए संभव नहीं है. वह बोला,” पापा, सड़क कितनी पतली हैं और खराब. और लोग इतने जो किसी की चिंता नहीं करते. वे मेरे रास्ते में आ जाते हैं और टकराते हैं. मैं फुटबॉल के मैदान में कितना तेज चलता हूँ. लेकिन जब मैं सड़क पर आता हूँ तो सब कुछ गड़बड़ हो जाता है." लड़का बिल्कुल रुआंसा था.

अगले दिन, उसके पिता उसे शहर में चल रहे सर्कस में ले गये. लड़का बहुत खुश था. उसे जोकरों के चेहरे और नाचते भालुओं को देखकर मज़ा आया. यहाँ एक रस्सी कई फुट उंचे दो खम्भों पर बंधी थी. एक लड़का आराम से रस्सी पर चल रहा था. फिर एक और लड़का आया जो रस्सी पर साइकिल चलाने लगा. छोटा लड़का हैरान था. अब, उसके पिता ने उस से पूछा, "मेरे बेटे ! बताओ, सड़क पर साइकिल के लिये तुम्हें कितनी जगह चाहिये ?" लड़के ने थोड़ी देर सोचा और कहा, "बस रस्सी जितनी" पिता ने कहा, "बेटा! हमें साइकिल चलाने के लिये केवल थोडी सी जगह चाहिये. जब कुछ लोग बिना किसी समस्या के रस्सी पर साइकिल चला सकते हैं तो हम कैसे चौडी सड़कों पर भी टकराते हैं और गिर जाते हैं. बेटा ! यह इसलिए कि हमारे मन की सड़क रस्सी से भी अधिक संकरी है. हम अपने लिए अनजानी सीमाएं और आधार हीन डर बना लेते हैं. इसके अलावा, हम अपनी सीमायें दूसरों पर डाल देते हैं. तो, बेटा ! जाओ, सोचो कि तुम एक रस्सी पर चलने वाले नट हो.

अगली सुबह वह बच्चा निर्भय सड़क पर तेजी से साइकिल चलाने लगा. सीमाओं, भय और पूर्वाग्रहों से अपने मन को मुक्त कर दो और तुमको सब कुछ मिल जाएगा.

13 टिप्‍पणियां:

  1. आशा भरी, प्रेरणा से भरपूर कहानी ....... बहुत अच्छी लगी .......

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  2. "सीमाओं, भय और पूर्वाग्रहों से अपने मन को मुक्त कर दो और तुमको सब कुछ मिल जाएगा."
    बहुत ही प्रेरणादायक वाक्य........!
    मैं
    तो
    पहली बार आपके ब्लॉग पर आया पर अच्छा लगा.

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  3. सच है, यदि मन में हो विश्वास तो कोई भी रास्ते काफी होते हैं.

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  4. यदि पूर्वाग्रह न हों तो नये मार्ग बन जाते हैं और हों तो अच्छे खासे रास्ते खो जाते हैं.

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  5. बहुत बढ़िया लिखा है आपने! अगर हममें कुछ करने का जज़्बा है और पूरा विश्वास है तो फिर उस कार्य को अंजाम देना नामुमकिन नहीं है हालाकि पूरी कोशिश करनी होगी!

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  6. पंकज
    कई समस्याओं के हल हमारे भीतर ही छुपे होते हैं .बस देखने और समझने की जरूरत है .

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  7. मुश्किलें तो आती रहेंगी पर हमे हिम्मत हारे बिना अपने काम को अंजाम देते जाना है । ऐसा ही कुछ संदेश देती आपकी ये कहानी आशा से भरपूर है। आपके ब्लॉग पर आकर बहुत अच्छा लगा ।

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  8. आज की भागती दौड़ती जिन्दगी में सकारात्मक सोच का होना बहुत जरूरी है ...दिमागी डॉक्टर की बढती हुयी संख्या बताती है की नकारात्मक सोच वाले लोगो की संख्या निरंतर बढ़ रही है ...ये हमारे आस पास के माहोल का असर है या हमारे खान- पान का ये हमें स्वयं ही तय करना होगा ...
    प्रेरणादायी कहानी है ....

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  9. KYA BAAT KAHI AAPNE .....WAAH !!! BAHUT BAHUT SUNDAR PRERNAPRAD KATHA DWARA JEEVAN KE LIYE MAHATVPOORN SEEKH DEE HAI AAPNE....

    MAN AANANDIT HO GAYA PADHKAR...AAPKA BAHUT BAHUT AABHAR....

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  10. पंकज जी,
    आपने साइकिल के जरिए जीवन का दर्शन समझा दिया...आप इतना अच्छा लिखते हैं लेकिन इतना कम क्यों लिखते हैं...आशा है आप शिकायत दूर करेंगे...

    जय हिंद...

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  11. सीमाओं, भय और पूर्वाग्रहों से अपने मन को मुक्त कर दो और तुमको सब कुछ मिल जाएगा.

    " very positive and motivating lines, i liked story too much"

    regards

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  12. अंतिम पैरा विशेष उल्लेखनीय है.
    इसे कहेंगे प्रेरक प्रसंग. सार्थक पोस्ट के लिए मेरी बधाई स्वीकारें!
    -सुलभ

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