मंगलवार, 10 नवंबर 2009

रास्ते आते हैं जहाँ से जाते हैं वहाँ


रास्ते आते हैं जहाँ से
जाते हैं वहाँ


रास्ते बदलने से
गिरने से, संभलने से
बचके निकलने से
होता है कुछ कहाँ
रास्ते आते हैं जहाँ से
जाते हैं वहाँ


रास्ते में नदी होती है
पहाड होते हैं
गांव होते हैं
शहर होते हैं
पडाव होते हैं
पर रास्ते होते हैं
मंजिल कहाँ
रास्ते आते हैं जहाँ से
जाते हैं वहाँ


रास्ते में लोग मिलते हैं
हंसते हैं, बिलखते हैं
फिर मिलने को कह
बिछडते हैं
पर किसी के लिये
रुकते हैं कहाँ
रास्ते आते हैं जहाँ से
जाते हैं वहाँ



चित्र : पिछले दिनों मथुरा में था, जहाँ आज भी जी टी रोड पर दिखती हैं ये कोस मीनार. ये रास्ते पर आज के माइल स्टोन की तरह दूरी तो बताती ही थी, यात्रियों की थकान भी उतारती थी.   इन्होंने तरह तरह के यात्रियों को एक दूसरे से मिलाकर एक संस्कृति भी बनाई जिसे आज हम गंगा जमुनी  संस्कृति कहते हैं. इनका नाम भी उसी मेल जोल का उदाहरण है, कोस संस्कृत है और मीनार फारसी.

11 टिप्‍पणियां:

  1. सच KAHA .......... RAASTE TO VAHEEN RAHTE हैं ...... बह HUM HI AATE JAATE हैं ..........

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  2. रस्ते बहुत कुछ ब्यान करते हैं ..कोस मीनार पहली बार जाना इसके बारे में शुक्रिया

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  3. इसे कहते हैं ब्लॉगरी की कविता ! उठा लिया बिषय रास्ते से और रच दिया।
    साथ साथ महत्त्वपूर्ण जानकारी भी देते गए।
    भइ वाह !

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  4. रास्ते वहाँ जाते हैं, जहाँ हम चाहते है. वह कहावत सुनी है, जहाँ चाह वहाँ राह. अच्छी कविता.

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  5. The woods are lovely, dark and deep,
    But I have promises to keep,
    And miles to go before I sleep,
    And miles to go before I sleep.

    हमें तो बस चलते जाना है....

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  6. अरे नहीं ! सुबह रास्ते स्कूल जाते हैं, शाम को घर

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  7. अरे नहीं ! सुबह रास्ते स्कूल जाते हैं, शाम को घर

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  8. पहले तो मैं आपका तहे दिल से शुक्रियादा करना चाहती हूँ मेरे ब्लॉग पर आने के लिए और टिपण्णी देने के लिए! मेरे इस ब्लॉग पर भी आपका स्वागत है-
    http://ek-jhalak-urmi-ki-kavitayen.blogspot.com
    मुझे आपका ब्लॉग बहुत अच्छा लगा! बहुत ही सुंदर और लाजवाब कविता लिखा है आपने जो काबिले तारीफ है!
    रास्ते में लोग मिलते हैं
    हंसते हैं, बिलखते हैं
    फिर मिलने को कह
    बिछडते हैं...
    बिल्कुल सही कहा है आपने! बेहद ख़ूबसूरत पंक्तियाँ!

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  9. "पर रास्ते होते हैं
    मंजिल कहाँ
    रास्ते आते हैं जहाँ से
    जाते हैं वहाँ"
    भाई बहुत खूब.. दार्शनिक अंदाज़ है.

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  10. shukriya behtar rachna ke liye.chalna hi jeevan hai aur raste aadhar

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  11. रास्तों के बहाने आपने जिंदगी के मर्म को उदघाटित कर दिया। बधाई।
    -Zakir Ali ‘Rajnish’
    { Secretary-TSALIIM & SBAI }

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